जालौन में ‘माता प्रसाद पुस्तकालय’ का शुभारंभ:कैलाश सत्यार्थी ने कहा- यह पुस्तकालय केवल एक भवन नहीं बल्कि ज्ञान की चिंगारी है
वहीं कार्यक्रम में वक्ताओं ने गांव में पुस्तकालय की स्थापना को शिक्षा और सामाजिक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। कार्यक्रम कालपी तहसील के ग्राम चमारी में आयोजित किया गया।
कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि यह पुस्तकालय केवल एक भवन नहीं बल्कि ज्ञान की चिंगारी है, जो पूरे बुंदेलखंड ही नहीं बल्कि देश-दुनिया में फैल सकती है। उन्होंने कहा कि यदि बुंदेलखंड में ऐसे 100 पुस्तकालय बनते हैं तो यह एक बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। उन्होंने बाल श्रम को समाज की बड़ी बुराइयों में से एक बताते हुए कहा कि जब तक एक भी बच्चा मजदूरी करने को मजबूर है, तब तक विकास अधूरा है।

डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने कहा कि शहरों के बाद अब गांवों में भी पुस्तकालय खुलने चाहिए ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के युवा आईएएस परीक्षा और आईपीएस परीक्षा जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकें। उन्होंने कहा कि यह पुस्तकालय बुंदेलखंड के युवाओं में नई चेतना जगाने का काम करेगा।

कुमार विश्वास ने कहा कि आज का युवा तेजी से अपनी सांस्कृतिक जड़ों और आध्यात्मिक मूल्यों की ओर लौट रहा है। उनके अनुसार पुस्तकें कल्पना, चेतना और विचारों की दुनिया बनाती हैं, जो डिजिटल माध्यम पूरी तरह नहीं कर सकता। ऐसे समय में गांव में पुस्तकालय की स्थापना एक बड़ी सांस्कृतिक पहल है।

सोनाली बेंद्रे ने कहा कि किताबें और कहानियां शिक्षा का सबसे प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने बताया कि जहां स्कूल और अन्य संस्थान बनने में समय लगता है, वहीं पुस्तकालय किसी भी पीढ़ी के लिए ज्ञान का द्वार खोल देते हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 50 लड़कियों को अपनाने की पहल को उन्होंने महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

हरिवंश नारायण सिंह ने कहा कि भारत का संविधान संवाद और सहमति की भावना से बना है और आज भी देश को आगे बढ़ाने के लिए उसी लोकतांत्रिक भावना की जरूरत है। उन्होंने कहा कि एक युवा पत्रकार द्वारा गांव में पुस्तकालय की पहल करना समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है।

जाकिर खान ने कहा कि आमतौर पर लोगों को रेस्टोरेंट या मनोरंजन कार्यक्रमों में बुलाया जाता है, लेकिन पुस्तकालय के उद्घाटन में बुलाया जाना गर्व की बात है। उन्होंने इस पहल को समाज में सकारात्मक बदलाव का संकेत बताया।
डॉ. विकास दिव्यकीर्ति ने कहा कि वह यहां पुस्तकालय का मॉडल देखने आए हैं। उन्होंने बताया कि उनकी संस्था में सैकड़ों छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क शिक्षा दी जा रही है और ग्रामीण क्षेत्रों में पुस्तकालय जैसे संसाधनों को मजबूत करने की आवश्यकता है।

इस अवसर पर क्षेत्र के युवाओं और ग्रामीणों में काफी उत्साह देखने को मिला। वक्ताओं ने उम्मीद जताई कि ‘माता प्रसाद पुस्तकालय’ आने वाले समय में बुंदेलखंड में शिक्षा और ज्ञान के नए आंदोलन की शुरुआत करेगा।
कार्यक्रम का आयोजन सौरभ द्विवेदी और इन्फो पार्क के डायरेक्टर अभय द्विवेदी द्वारा किया गया। कार्यक्रम में आशीष पटेल, प्रशांत सिंह, प्रतीक सिंह और अवनीश सागा सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।