ज्ञान से संवेदनशीलता को जोड़ समाज में बदलाव लाएं : कैलाश सत्यार्थी
आईआईटी आईएसएम धनबाद में शनिवार को शताब्दी वर्ष के मौके पर आयोजित शताब्दी व्याख्यान को संबोधित करते हुए नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि आज के समय में बढ़ती उदासीनता समाज के लिए खतरा है। इसे करुणा के जरिए ही दूर किया जा सकता है। करुणा केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि एक सक्रिय शक्ति है, जो समाज को बदल सकती है। सत्यार्थी ने पेनमेन हॉल में आयोजित व्याख्यान में कम्पैशन क्वोशेंट (सीक्यू) की अवधारणा को रखते हुए कहा कि हर व्यक्ति को दूसरों के दुख को अपना समझकर कार्य करना चाहिए। बताते चलें कि कम्पैशन क्वोशेंट (करुणा गुणांक) किसी व्यक्ति की करुणा (सहानुभूति, संवेदनशीलता और मदद की भावना) को मापने का एक पैमाना है।अविनाश चंद्र एवं वीणानी सिन्हा मेमोरियल लेक्चर सीरीज़ के तहत शताब्दी व्याख्यान में कैलाश सत्यार्थी ने विस्तार से छात्र-छात्राओं, शिक्षकों को संबोधित किया। उन्होंने तकनीक के क्षेत्र में भी करुणा के महत्व पर जोर देते हुए कम्पैशनेट एआई की आवश्यकता बताई। उनके अनुसार यदि तकनीक में मानवीय मूल्यों का समावेश नहीं होगा तो विकास अधूरा रह जाएगा। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे ज्ञान के साथ संवेदनशीलता को जोड़कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाएं। आईआईटी धनबाद कैंपस में पहली बार किसी नोबेल पुरस्कार विजेता ने अपना व्याख्यान दिया।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आईआईटी के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा ने इस आयोजन को संस्थान के लिए ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि वास्तविक शांति तभी संभव है, जब विज्ञान और तकनीक का उपयोग समाज की भलाई के लिए किया जाए। इस व्याख्यान शृंखला की शुरुआत के लिए मिहिर सिन्हा के योगदान की सराहना की। यह व्याख्यान शृंखला संस्थान के प्रतिष्ठित पूर्व छात्र मिहिर सिन्हा (1966 बैच, पेट्रोलियम इंजीनियरिंग) की ओर से अपने माता-पिता की स्मृति में शुरू की गई है। इसका उद्देश्य विज्ञान, तकनीक और मानविकी के बीच संवाद को बढ़ावा देना है ताकि शिक्षा और समाज के बीच बेहतर संतुलन स्थापित हो सके। मौके पर संस्थान के उपनिदेशक प्रो. धीरज कुमार, रजिस्ट्रार प्रबोध पांडेय, डीन कॉरपोरेट कम्युनिकेशन रजनी सिंह समेत अन्य शिक्षक व अधिकारी मौजूद थे।समाज के हर वर्ग को अपनी भागीदारी निभानी होगीकैलाश सत्यार्थी ने बचपन बचाओ आंदोलन की चर्चा करते हुए स्वयं के संर्घष की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बाल अधिकारों और शिक्षा के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर तय किए गए लक्ष्य अब तक पूरी तरह हासिल नहीं हो सके हैं। जब तक दुनिया का हर बच्चा सुरक्षित, शिक्षित और शोषण से मुक्त नहीं होगा, तब तक यह अभियान अधूरा रहेगा और इसे पूरा करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। बच्चों के अधिकारों की रक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग को अपनी भागीदारी निभानी होगी। आईआईटी धनबाद के छात्रों की संस्था कर्तव्य की ओर से किए गए कार्यों की सराहना की। युवा केवल अपने कैरियर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझते हैं।