विश्व पुस्तक मेले में कैलाश सत्यार्थी दिया करुणा का ‘3डी’ मंत्र, पोलैंड के राजदूत से साझा किया इतिहास
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। भारत मंडपम में चल रहे 53वें विश्व पुस्तक मेले के पांचवें दिन का शुभारंभ अंतरराष्ट्रीय फोकस के साथ हुआ, विदेशी मंडप में साहित्य, कूटनीति व पुस्तकों के भविष्य पर वैचारिक सत्रों का आयोजन हुआ।
बुधवार का एक अन्य आकर्षण पोलैंड के राजदूत एचई पियोटर स्विटाल्स्की के साथ ”बुक्स एंड लिटरेचर पर एक संवाद” था। राजदूत ने कहा कि भारत की ही तरह पोलैंड को भी विभाजन का दंश झेलना पड़ा है।
यह दोनों देशों की साहित्यिक परंपराओं की ताकत थी कि उन्होंने अपनी धर्मनिरपेक्ष पहचान को जीवित रखा। उन्होंने दो राष्ट्रों और राज्य के गठन के संबंध में उनके साझा ऐतिहासिक और सामाजिक इतिहास के बीच एक कड़ी के रूप में रबींद्रनाथ टैगोर के लेखन की भी बात की।

कैलाश सत्यार्थी का युवाओं के लिए थ्रीडी विजन
नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने करुणा की शक्ति पर बात करते हुए अपनी आगामी पुस्तक करुणा: द पावर आफ कम्पेशन और उनकी हाल ही में प्रकाशित आत्मकथा पर बात की।
युवा दर्शकों को संबोधित करते हुए, उन्होंने आधुनिक संबंधों की नजाकत और सहानुभूति, जिम्मेदारी और सम्मान की तत्काल आवश्यकता के बारे में बात की। जीवन के लिए अपने प्रेरणादायक थ्रीडी मंत्र सुझाया। युवाओं से करुणा को उद्देश्यपूर्ण कार्रवाई में बदलने का आग्रह किया।

पुस्तक विमोचन और चर्चा
हाॅल नं. पांच में प्रभात प्रकाशन के स्टाल पर लेखक सचिन कुमार जैन की नई पुस्तक भारत में सामाजिक नागरिक पहल का ऐतिहासिक सफरनामा का विमोचन हुआ। संपादक पूजा सिंह, लेखक सचिन जैन, निदेशक प्रभात कुमार और पीयूष कुमार उपस्थित रहे।
जैन की पुस्तक नागरिक आंदोलनों के सफर को दर्शाती है, जो समाज को प्रेरित करती है। इसके अलावा नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी की बेस्टसेलर पुस्तकों—सपनों की उड़ान, आजाद बचपन की ओर, बदलाव के बोल, सभ्यता का संकट और समाधान—पर गहन चर्चा हुई। इन किताबों ने बाल अधिकार, शिक्षा और सामाजिक परिवर्तन पर प्रकाश डाला।

साहित्यिक उत्सव और सांस्कृतिक मंच भी आए साथ
दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 का फेस्टिवल आफ फेस्टिवल्स 3.0 भारत मंडपम को एक ऐसे मंच के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जहां देश के प्रतिष्ठित साहित्यिक उत्सव एवं सांस्कृतिक मंच एक साथ आ गए हैं। पुस्तक लोकार्पण, समूह चर्चा और विशेष सत्रों में 100 से ज्यादा वक्ता इसमें शामिल हो रहे हैं।
इनमें शामिल पुरी लिटरेचर फेस्टिवल (पीएलएफ) ने देश के इतिहास, स्मृति, आस्था, जेंडर और समकालीन जीवन से जुड़े विषयों पर बौद्धिक रूप से समृद्ध सत्रों की एक श्रृंखला का संयोजन किया है। ‘रेल्स, रिपब्लिक, एंड दि लाइव्स वी इनहेरिट’ शीर्षक सत्र में भारतीय रेलवे को देश के एक जीवंत अभिलेख के रूप में प्रस्तुत किया गया।

नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल प्राचीन नालंदा की उस विरासत से प्रेरित है, जो कभी वैश्विक ज्ञान का प्रमुख केंद्र हुआ करता था। द ग्रेट इंडियन बुक टूर के अंतर्गत आयोजित साहित्यिक संवादों ने फेस्टिवल आफ फेस्टिवल्स 3.0 के दायरे को और विस्तार दिया।
महोत्सव की सहयोगपूर्ण भावना इसमें शामिल आयोजकों से भी झलकती है। एशियन लिटरेरी सोसायटी के मनोज कृष्णन ने इस मेले को एशियाई साहित्य को व्यापक भारतीय पाठक वर्ग तक पहुँचाने का अवसर बताया।
द ग्रेट इंडियन बुक टूर के आयोजक प्रशांत ने देशभर के उभरते लेखकों को सशक्त बनाने के टूर के उद्देश्य पर प्रकाश डाला और कहा कि यह महोत्सव नए स्वरों को उपस्थिति और अवसर प्रदान करता है।