आईआईटी धनबाद में कैलाश सत्यार्थी का ऐतिहासिक व्याख्यान: करुणा से समाज बदलने का आह्वान
आईआईटी (आईएसएम) परिसर में किसी नोबेल पुरस्कार विजेता का यह पहला आगमन भी रहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा ने की, जबकि डीन कॉरपोरेट कम्युनिकेशन प्रो. रजनी सिंह ने आयोजन और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यह व्याख्यान श्रृंखला संस्थान के प्रतिष्ठित पूर्व छात्र मिहिर सिन्हा (1966 बैच, पेट्रोलियम इंजीनियरिंग) द्वारा अपने माता-पिता की स्मृति में दिए गए योगदान से शुरू की गई है। इसका उद्देश्य विज्ञान, तकनीक और मानविकी के बीच संवाद को बढ़ावा देना है, ताकि शिक्षा और समाज के बीच बेहतर संतुलन स्थापित हो सके।
करुणा केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि एक सक्रिय शक्ति है
अपने संबोधन में कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि करुणा केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि एक सक्रिय शक्ति है, जो समाज को बदल सकती है। उन्होंने ‘कम्पैशन क्वोशेंट (CQ)’ की अवधारणा रखते हुए कहा कि हर व्यक्ति को दूसरों के दुख को अपना समझकर कार्य करना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि आज के समय में बढ़ती उदासीनता समाज के लिए खतरा है और इसे करुणा के माध्यम से ही दूर किया जा सकता है। उन्होंने तकनीक के क्षेत्र में भी करुणा के महत्व पर जोर देते हुए ‘कम्पैशनेट एआई’ की आवश्यकता बताई।
उनके अनुसार, यदि तकनीक में मानवीय मूल्यों का समावेश नहीं होगा, तो विकास अधूरा रह जाएगा। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे ज्ञान के साथ संवेदनशीलता को जोड़कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाएं।
विज्ञान और तकनीक का उपयोग समाज की भलाई के लिए हो
निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में इस आयोजन को संस्थान के लिए ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि वास्तविक शांति तभी संभव है, जब विज्ञान और तकनीक का उपयोग समाज की भलाई के लिए किया जाए।
उन्होंने इस व्याख्यान श्रृंखला की शुरुआत के लिए मिहिर सिन्हा के योगदान की सराहना की और उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की।
प्रो. रजनी सिंह द्वारा पढ़े गए संदेश में मिहिर सिन्हा ने अपनी अनुपस्थिति पर खेद जताया, जो एक दुर्घटना के बाद अस्पताल में भर्ती होने के कारण रही। उन्होंने इस व्याख्यान श्रृंखला को अपने माता-पिता के मानवीय मूल्यों को समर्पित बताते हुए कहा कि समाज को अधिक संवेदनशील और न्यायपूर्ण बनाने में मानविकी की महत्वपूर्ण भूमिका है।
कार्यक्रम में संस्थान के बड़ी संख्या में शिक्षक, छात्र, अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। पेनमैन ऑडिटोरियम में उत्साहपूर्ण माहौल देखने को मिला और प्रतिभागियों ने पूरे मनोयोग से व्याख्यान को सुना। यह आयोजन आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में दर्ज हुआ, जिसने ज्ञान, तकनीक और मानवीय मूल्यों के समन्वय का सशक्त संदेश दिया।